छपरा नगरवासियों के खाने-पीने की आदतों पर वैश्वीकरण का प्रभाव
अनिता कुमारी1, अरुणा कुमारी2
1षोध-अघ्येता, जयप्रकाष विष्वविद्यालय छपरा बिहार.
2सहायक आचार्य, लोकमान्य महाविद्यालय, छपरा बिहार.
*Corresponding Author E-mail:
शोध-सारांषरू
छपरा नगर में हाल के वर्षों में भोजन सामग्री के चयन पर वैष्वीकरण का काफी प्रभाव पड़ा है। यहाँ संपूर्ण भोजन-तंत्र पर पारम्परिक उत्पादो की अपेक्षा बाजार में तैयार भोजन सामग्री की ओर खरीदने की क्षमता में विकास हुआ है। इस शोध का मुख्य उद्देष्य वैष्वीकरण के प्रभाव में ब्रांडेड भ®जन-सामग्रियों के प्रति रुझान के अध्ययन हेतु 110 प्रतिभागियों का साक्षात्कार करके प्रदर्षित किया गया है। यह अध्ययन दर्षाता है कि अधिकांष प्रतिभागी आधुनिक भोजनों के शौकीन है। इन आधुनिक उत्पादों के प्रति उनका रुझान पारम्परिक भोजन की अपेक्षा या इनकी रुचि का परिचायक है।
शब्दकुंजी रू भोजन सामग्री के वैष्वीकरण का प्रभाव.
परिचयरू
भारतीय खाने के शौकीन होते हैं एवं बनार्ड शाँ का कथन सत्य है कि अच्छा भोजन भी जीवन का प्रेम दर्षाता है। हाँलाकि बढ़ते नगरीकरण एवं वैष्वीकरण के कारण भारत में भोजन के प्रति विचारधारा बदल रही है। भारतीय विचारधारा में आजादी के बाद जीवन षैली का परिवर्तन आहार व्यवहार पर भी परिलक्षित हुआ है। अब महिलाएँ भोजन पकाने के बदले तैयार भोजन की ओर ज्यादा आकर्षित हो रही है। यहाँ भोजन प्रोसेसिंग उद्योग का भी विकास हो रहा है। इसके साथ ही विदेषी भोजनों के प्रति भी आकर्षण बढ़ता जा रहा है।
भारत के निजी उपभोगों में भोजन तथा भोज्य उत्पादों का 53ः हिस्सेदारी है। यह उपभोग क्षमता विकासशील देशों के 20ः हिस्सेदारी से काफी अधिक (आस्कर तथा अन्य, 2013) है।
भारत के प्रायः नगरो में पाष्चात्य जीवन षैली का प्रभाव परिलक्षित (अली तथा अन्य, 2010) हो रहा है। यहाँ भोज्य सामग्रियों का उत्पादन करने वाली अनेक कम्पनियों का प्रवेष वैष्वीकरण के बाद हुआ है। यहाँ जीवनशैली में परिवर्तन तथा एकल परिवार की धारणा से प्रभावित परिवार डिब्बाबंद भोजनों को पसन्द करने लगे है। इन भोजनों को पकाने में समय तथा उर्जा की बचत होने से नौकरीपेषा महिलाओं में आकर्षण बढ़ना स्वभाविक है। परिवार में पुरुष तथा महिला दोनो के नौकरीपेषा होने से उत्कृष्ट भोज्य उत्पादों की माँगवृद्धि (कथुरी तथा गिल, 2013) हुई है।
यहाँ तैयार भोजन उत्पादों की माँगवृद्धि हाल के वर्षो में हुई है। अब भोजन बनाने की अपेक्षा तैयार भोजन से लेकर षीध्र बननेवाली भोजनों की माँग बढ़ी है। किसी षहर में डिब्बाबंद भोजनों की ओर आकर्षण का मुख्य कारण जीवनषैली में परिवर्तन के साथ व्यस्त जीवन षैली में परिवर्तन के साथ व्यस्त जीवनशैली तथा विभिन्न कार्यो में महिलाओं की भागीदारी होने से सुविधाजनक एवं स्वास्थ्यप्रद भोजनों की ओर आकर्षण (प्रसाद तथा आर्यश्री, 2008) बढ़ा है।
षिवकुमार (2004) ने बताया है कि विभिन्न आय समूहों के परिवारों में सदस्यों में तैयार भोजन की अपेक्षा कम लागत मूल्य एवं विज्ञापनों का भी प्रभाव पड़ा है। आज कुछ वैष्विक भोजन उत्पाद बिना पकाये या तैयार किए उपयोग लायक है, जिनमें तुरन्त परोसने योग्य भोजनों, डिब्बाबंद भोजनों, जमा हुआ भोजन, षीध्र उत्पादों, सूखे भोजनों तथा परिरक्षित भोजनो का उपभोग प्रगति पर (सेल्वा राजन, 2012) है। इसके अलावा तैयार भोज्य-उत्पादों के अधिक चटपटे तथा उत्तम स्वाद भी आर्कषण का कारण (सेल्वाराजन, 2013) है।
षोध प्रविधि:-
इस अध्ययन का उद्देष्य जनसंख्यिकीय तथा मनोसांख्यिकीय निर्धारको द्वारा छपरा नगरवासियों के भोजन चयन एवं तैयार भोज्य उत्पादों के प्रयोग पर वैश्वीकरण का प्रभाव प्रदर्षित करना है। इस अध्ययन में हाल के उपभोक्ता व्यवहार के साथ ही खरीदने के निर्णयों में प्रभावकारी तथ्यों का विष्लेषण किया गया है।
यह षोध छपरा नगरवासियों के आहार व्यवहार संबंधी व्यवहार के अध्ययन हेतु मार्च 2018 से अप्रैल 2019 के बिच 110 प्रतिभागियों के उपभोग व्यवहार द्वारा आँकड़ों के संग्रह हेतु प्रष्नावली विधि का प्रयोग हुआ है।
शोध परिणाम एवं विवेचना:
इस शोध के आँकड़ो से तैयार सारणी 1 में प्रतिभागियों का व्यक्तिगत प्रोफाईल दर्षाया गया है। इसमें प्रतिभागियों को उम्र समूह, शैक्षणिक योग्यता, पेषा, वैवाहिक स्थिती, परिवार की प्रकृति, परिवार के प्रकार तथा पारिवारिक आय के आधार पर श्रेणियों का निर्माण सम्पन्न हुआ है।
सारणी 2 में पारंपरिक उत्पादों तथा तैयार योजनाओं के प्रति आकर्षण प्रतिभागियों के सामाजिक-आर्थिक स्थिती से सम्बद्ध किया गया है। यह सारणी दर्षाता है कि 21-30 वर्ष के उम्र समूह में तैयार भोजन के प्रति सर्वाधिक 41ः रुझान है। इसी तरह विद्यालय स्तर के शैक्षणिक सदस्यों में 31ः आकर्षण तैयार या आधुनिक भोजनों के प्रति प्रदर्षित हुआ है। इस सारणी में पेषा, वैवाहिक स्थिती, परिवार की प्रकृति, परिवार का प्रकार तथा पारिवारिक आय का भी प्रभाव दिखाया गया है।
सारणी 1: व्यक्तिगत सूचना के आधार पर उत्तरदाताओं का वित्तरण
सारणी 2ः शीध्र परोसने योग्य भोजनो का उपभोग समय
सारणी 3ः प्रतिभागियों की क्रय-क्षमता
सारणी 4ः प्रतिभागियों की क्रय आवृति
सारणी 5ः वैष्विक भोजन के प्रति आकर्षण की प्रेरणा
सारणी 2 में शीध्र परोसने योग्य भोजनों के उपयोग समय को दर्षाया गया है। यहाँ 5 से 10 वर्षो से 51.82ः, 5 वर्षो से कम 30.91ः, 10-15 वर्षो से 10.91ः तथा 15 वर्षो से अधिक समय से शीध्र परोसने योग्य भोजन का उपयोग करनेवाले लोगों की संख्या है। इसी तरह सारणी 3 प्रतिभागियों के क्रय निर्णय एवं सारणी-4 खरीदने की आवृति से सॅबंधित है। इन प्रतिभागियों को वैश्वीकृत भोजना की ओर उत्प्रेरित करने वाले माध्यमों को सारणी 5 में प्रदर्षित किया गया है।
इस शोध-पत्र में पारंपरिक भोजनो की अपेक्षा आधुनिक तैयार भोजनें के प्रति आकर्षण हेत् उम्र, षैक्षणिक योग्यता, पेषा की स्थिती, वैवाहिक स्तर, परिवार की प्रकृति के साथ पारिवारिक आय के आधार पर प्रतिभागियों को वर्गीकृत करके विष्लेषण का कार्य हुआ है। रीतू आनन्द (2011) ने भी वैष्विक भोजनों की ओर रुचि के लिए निर्धारक तत्वों की व्याख्या की है। इसी पैटर्न पर बालास्वामी तथा अन्य (2012) द्वारा षीध्र परोसने लायक आधुनिक भोजनों हेत् अपयोग समय तथा अभिरुचि का अध्ययन हुआ है। भास्कर तथा अन्य (2014) ने ब्रांडेड परिषोधित भोजनों के प्रति उपभोगकत्र्ताओं की क्रय-क्षमता एवं खरीदने की आवृतियों का अध्ययन किया है।
यहाँ प्रस्तुत षोध में खाने-पीने की आदतों पर वैष्वीकरण का प्रभाव परिलक्षित हुआ है। छपरा नगरवासियों में पारम्परिक भोजनों की अपेक्षा तैयार या षीध्र तैयार हो जाने लायक भोजनों की तरफ अभिरुचि तथा आर्कषण बढ़ा है। यह आर्कषण नगरीकरण तथा वैश्वीकरण द्वारा द्वारा मुख्यतः वृद्धि की ओर अग्रसर है। आज युवावर्ग में वैष्वीकरण का प्रभाव अधिक तेजी से बढ़ रहा है। आज आधुनिक भोजनों पर विज्ञापन तथा कम मूल्य में वित्तरण भी पारम्परिक भोजनों की अपेक्षा आर्कषण बढ़ाने में सक्षम सिद्ध हुआ है।
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Received on 22.12.2020 Modified on 19.02.2021
Accepted on 15.03.2021 © A&V Publication all right reserved
Int. J. Ad. Social Sciences. 2021; 9(1):37-40.